क्या भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट भी फेल हो सकता है?
जिस PSLV को ISRO का “वर्किंग हॉर्स” कहा जाता था, वही अगर एक साल में दो बार फेल हो जाए तो सवाल उठना लाज़मी है।
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क्या यह सिर्फ तकनीकी विफलता है?
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या फिर ओवर कॉन्फिडेंस, क्वालिटी कंट्रोल या संस्थागत राजनीति की चूक?
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क्या भारत की स्पेस विश्वसनीयता पर इसका असर पड़ेगा?
👉 2025–26 की शुरुआत में PSLV C61 और C62 की विफलता ने केवल वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि UPSC–SSC जैसे परीक्षार्थियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अध्ययन विषय बना दिया है।
आज इस लेख में हम बिल्कुल Teacher-Style में, सरल भाषा में, इस पूरे मामले को समझेंगे।
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| ISRO PSLV Failure |
🧠 PSLV क्या है? (Basics – Exam Foundation)
PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle)
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ISRO का मध्यम श्रेणी का रॉकेट
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Low Earth Orbit (200–1000 km) में सैटेलाइट छोड़ने के लिए
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Earth Observation, Remote Sensing, Defence payloads के लिए उपयोग
🔹 चार स्टेज
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First Stage – Solid Fuel
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Second Stage – Liquid Fuel
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Third Stage – Solid Fuel
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Fourth Stage – Liquid Fuel
📌 UPSC Fact: PSLV ने 100+ satellites एक साथ लॉन्च करने का रिकॉर्ड बनाया है।
📅 Timeline: क्या-क्या हुआ? (Chronological Clarity)
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1994 – PSLV की पहली सफल उड़ान
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1997, 2017 – कुछ असफलताएं
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May 2025 – PSLV C61 फेल
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Jan 12, 2026 – PSLV C62 फेल (Anvesha Satellite Mission)
👉 22 साल की निरंतर सफलता के बाद, एक ही साल में दो विफलताएं = Red Flag
🛰️ Anvesha Satellite क्या था? (Defence + GS Paper Angle)
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DRDO द्वारा विकसित
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Advanced Earth Observation Satellite
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100+ spectral bands
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दुश्मन के ठिकानों की हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग
📌 GS-III (Defence + Space Tech) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
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| Anvesha Satellite Explained |
💥 असल फेलियर कहाँ हुआ? (Technical Analysis – Simplified)
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PSLV Third Stage ignition पर फेल
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Telemetry signal अचानक बंद
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Solid Rocket Motor activate नहीं हुआ
संभावित कारण:
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Nozzle defect
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Structural casing issue
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Pressure imbalance
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Manufacturing / Quality lapse
⚠️ Important Point:
PSLV हर बार नया बनता है।
➡️ “पुराना इंजन खराब हो गया” वाला तर्क लागू नहीं होता।
💰 आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय नुकसान (Economy + IR)
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Mission cost: ₹250–300 करोड़
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15 co-passenger satellites (8 विदेशी – UK, France, Brazil, Nepal)
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Commercial launches के पैसे लौटाने पड़ सकते हैं
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ISRO की commercial arm NSIL की साख पर असर
📌 GS-II + GS-III इंटरलिंकिंग
🌍 Brand India पर असर? (Essay + Ethics Angle)
भारत को सस्ता, भरोसेमंद स्पेस लॉन्च हब माना जाता था।
लगातार फेलियर से यह धारणा कमजोर हो सकती है।
➡️ “Chinese goods” जैसी तुलना सोशल मीडिया पर दिखना चिंता का विषय है।
🏛️ क्या ISRO में राजनीति हो रही है? (Sensitive but Exam-Relevant)
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Leadership change के बाद early failure
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Former chairpersons के बीच मतभेद की चर्चा
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Lobbying, PR culture, celebrity scientists की बहस
⚠️ Exam Point:
संस्थान > व्यक्ति
Governance, oversight और accountability जरूरी।
Read This :- भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल: क्या अब दुश्मन को दिखेगी भी नहीं?
🧪 क्या यह साजिश हो सकती है?
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इतिहास में ISRO से जुड़े विदेशी हस्तक्षेप के आरोप
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Defence payload होने के कारण शंका
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लेकिन कोई ठोस प्रमाण नहीं
📌 UPSC दृष्टिकोण:
➡️ Speculation से बचें, evidence-based analysis रखें।
🟢 Positive संकेत भी हैं
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Spain का KID satellite signal भेजने में सफल
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ISRO failures से सीखकर वापसी करता रहा है
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Chandrayaan-3 इसका उदाहरण है
📘 Exam Ready Takeaways (Quick Notes)
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PSLV = India’s workhorse launch vehicle
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Failure at Third Stage ignition (Solid motor)
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Impact: Defence, Economy, International trust
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Need: Quality control + Institutional integrity
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Failure ≠ Collapse, but Course Correction Signal
🏁 Conclusion
विज्ञान में विफलता अंत नहीं होती, लेकिन दोहराई गई विफलता चेतावनी जरूर होती है।
ISRO की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।
तकनीकी जांच के साथ-साथ संस्थागत पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है।
अगर भारत को Space Superpower बनना है, तो
➡️ Systems मजबूत करने होंगे, personalities नहीं।
🤔 आप क्या सोचते हैं?
क्या यह सिर्फ तकनीकी चूक है या सिस्टम में सुधार की ज़रूरत?
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